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Create Salary slip in Excel

Complete Payroll Structure in Excel

अगर आप सैलरी स्लीप में आने वाले सरे कम्पोनन्ट के बारे में डिटेल में जानना चाहते है तो सही पेज आपने विजिट किया है |
 
सैलरी स्लीप  में  ग्रॉस सैलरी (सकल वेतन), नेट सैलरी (कुल वेतन), बेसिक सैलरी(मूल वेतन), इसके आलावा प्रोविडेंट फण्ड(भविष्य निधि), प्रोफेशनल टैक्स(वृत्ति कर), ट्रैवेलिंग अलाउंस (यात्रा बत्ता) , हाउस रेंट अलाउंस (घर भाड़ा बत्ता) , डेअरनेस अलाउंस (महंगाई बत्ता),  ये साडी चीज़े होती और इसके ऊपर होता है कंपनी का CTC, अब CTC क्या है डिटेल में समजते है |
 

CTC याने Cost to Company ( कंपनी को लागत) :

एक एम्प्लोयी के पीछे साल में होनेवाले DIRECT और INDRIECT  सारे खर्चोंका लेखा जोखा
डायरेक्ट में उसकी सैलरी आएगी और इनडाइरेक्ट में उसका बोनस, मेडिकल अलाउंस, इ. चीजे आएगी |
 
आसान भाषा समजे तो आपको किसी भी प्रोफेशनल और टेक्निकल एम्प्लोयी का जॉब पे रखते समय उसके साथ बस ग्रॉस सैलरी (सकल वेतन) का जिक्र किया जाता है, पर उसे हाथ में मिलने वाली नेट सैलरी याने कुल वेतन वो ग्रॉस में से PF- Provident Fund और PT – Professional Tax  ये दोनों कम करके मिलती है | ये सभी जीचे आपके सैलरी स्लिप में होती है पर इसमें कंपनी की तरफ से एम्प्लोयी को कुछ अडिशनल चीजे मिलती वो ये की कंपनी एक फॅमिली पिकनिक की अलाउंस एम्प्लोयी को साल में एक बार देती है उसे – LTA – Leave Travelling Allowance बोलते है | इसके आलावा साल में एक बार बोनस दिया जाता है और १५००० के ऊपर अगर एम्प्लोयी की सैलरी है तो उसे मेडिकल अलाउंस भी दिया जाता है,PF खाली एम्प्लोयी की सैलरी में से ही कम नहीं करते इसके अलावा EMPLOYER PF CONTRIBUTION  (कंपनी की तरफ से एम्प्लोयी के PF अकाउंट में कंपनी के तरफ से उतनी ही अमाउंट जमा किए जाती है जितनी एम्प्लोयी का PF कम किया जाता है) | 
 

चलिए PF- Provident fund को डिटेल में समझते है |

ये एक १९५२ एक्ट है जिसमे ये तय हुआ है हर एक कंपनी अपने एम्प्लोयी एक पर्टिकुलर अमाउंट उसकी सैलरी में से कम करके और साथ में जीतनी अमाउंट उसकी सैलरी से कम की है उतनी ही अमाउंट खुद की तरफ से लेके सेंट्रल गवर्नमेंट के PROVIDENT FUND डिपार्टमेंट में उसी एम्प्लोयी की अकाउंट में जमा किए जाएगी | ये एम्प्लोयी के लिए एक भविष्य निधि के रूप संगृहीत किए जाती, एम्प्लोयी उसे ६ महीने के बाद कभी भी विड्रॉ कर सकता है |
 
तो इसमें एक EMPLOYEE PF होता है और दूसरा EMPLOYER PF  होता है |
 
बेसिक सैलरी याने मूल वेतन वो होता जिसपे HRA, TA, DA जैसी सारी चीजे कैलकुलेट किए जाती है , और अटेंडेंस और ओवरटाइम का कैलकुलेशन भी इसी सैलरी पे होता है |

 

अब HRA को समझते है :

HRA – House Rent Allowance (घर भाड़ा बत्ता)
HRA नाम का ये पे हेड आपने सैलरी स्लिप में तो देखा ही होगा अब ये होता क्या है समझते है | कंपनी अपने एम्प्लोयी को जो घर में रहता है, वो अगर रेंट पे है तो उसके लिए घर भाड़ा बत्ता देती है, अब जरुरी नहीं की एम्प्लोयी रेंट पे रहता हो उ
सका खुदका घर भी होगा | तो कंपनी ये पे हेड सैलरी स्लिप में ऐड इसीलिए करती है की एम्प्लोयी को टैक्स बेनिफिट मिले |
अब इसका कैलकुलेशन आप आपके हिसाब से कर सकते है बस आपको करना ये है ५% से लेकर ७० % तक आप एम्प्लोयी का HRA  कैलकुलेट कर सकते है और वो उसके बेसिक पे होगा | ज्यादा जानकारी के लिए निचे दिया गया वीडियो लिंक आप देख सकते है |
 

अब TA – Travelling Allowance के बारे में समजते है

 
ये होता है एम्प्लोयी को ऑफिस से घर तक और घर से ऑफिस तक का खर्चे का अलाउंस इसके ऊपर सेंट्रल गवर्नमेंट साल में ९६०० रुपए का टैक्स बेनिफिट देता है | अगर इसे ज्यादा अमाउंट आपकी ट्रैवेलिंग अलाउंस में  दिखाई जाती है तो फिर ९६०० से ऊपर आने वाले अमाउंट को टैक्स कैलकुलेशन में लिया जाता है |
 

अब DA – Dearness Allowance के बारे में समजते है |

महंगाई बढ़ने पर बहोत सारी कंपनी अपने एम्प्लोयी को ये अलाउंस पे करती है | इसका कैलकुलेशन कुछ ऐसा होता है महीने के बेसिक सैलरी के आधा सैलरी पुरे साल का डरनेस अलाउंस पकड़ा जाता है |
 
दरसल ये सारे पे हेड्स आपको टैक्स बेनिफ्ट मिले इसीलिए भी होते है|
 

अब PT -Professional Tax

ये टैक्स आपकी सैलरी में से DEDUCT करके स्टेट डेवलोपमेन्ट के लिए जमा किया जाता है इसका कैलकुलेशन कुछ इस तरह से होता है | अगर आपकी ग्रॉस सैलरी १०००० से ज्यादा है तो २०० रुपये, और ७५०० से ज्यादा है तो १७५ रुपये और उससे काम है तो नील टैक्स | पर फेब्रुअरी मंथ का टैक्स ३०० रूपए होता है क्यूंकि एम्प्लोयी २८ दिन का काम करके ३० दिन की सैलरी लेता है |